छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैकुंठपुर में 92 वर्षीय मीसा बंदी डॉ. निर्मल कुमार घोष से उनके निवास पहुंचकर आत्मीय मुलाकात की। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि इतिहास, संघर्ष और विचारों के सम्मान की एक भावनात्मक झलक बनकर सामने आई।
इमरजेंसी के दौरान 18 महीने जेल में रहे डॉ. घोष के जीवन संघर्ष को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से सुना और उन्हें सम्मान दिया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और कृषि मंत्री राम विचार नेताम भी मौजूद रहे।
डॉ. घोष की पुत्री सुभरणा घोष के अनुसार, मुलाकात बेहद आत्मीय माहौल में हुई। मुख्यमंत्री और डॉ. घोष दोनों लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे, जिससे बातचीत में साझा अनुभवों की सहजता भी दिखाई दी।
उम्र और शारीरिक असुविधा के बावजूद डॉ. घोष आज भी बैकुंठपुर के विकास को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से फूलपुर होते हुए शहर में प्रवेश करने वाले पुराने मार्ग को फिर से शुरू करने और वहां नया पुल बनाने का सुझाव दिया, ताकि आवागमन बेहतर हो सके।
व्यक्तित्व की झलक:
एक समय था जब डॉ. घोष रोज साइकिल से चरचा स्थित अपने दवाखाने पहुंचते थे। योग साधना से उन्होंने खुद को लंबे समय तक स्वस्थ रखा और योगासन में विशेष दक्षता हासिल की। आज भले ही चलने-फिरने में असमर्थ हैं, लेकिन उनकी सादगी, अनुशासन और समाज के प्रति समर्पण अब भी लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
यह मुलाकात सिर्फ एक वरिष्ठ नागरिक का हालचाल जानने भर की नहीं थी, बल्कि उस पीढ़ी के संघर्ष और मूल्यों को सम्मान देने का एक सशक्त संदेश भी थी — जिसने इतिहास को जीकर देखा है और आज भी समाज के भविष्य को लेकर सजग है।

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