जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत खोड में समर्सिबल पंप स्थापना के नाम पर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि बाजार मूल्य से लगभग दोगुनी दर पर समर्सिबल पंप का बिल लगाकर शासकीय राशि आहरित कराने का दबाव ग्राम पंचायत सचिव पर बनाया गया। सचिव द्वारा सहमति न देने पर उनके खिलाफ बिना किसी प्रारंभिक जांच के निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
क्या है पूरा मामला
:- प्राप्त जानकारी के अनुसार बाजार में 1 एचपी, 10 स्टेज का समर्सिबल पंप लगभग 13,500 रुपये में उपलब्ध है, 25,500 रुपये प्रति पंप का बिल तैयार किया गया। इस प्रकार पांच पंपों के नाम पर लगभग 2 लाख 80 हजार रुपये आहरित कराने का दबाव ग्राम पंचायत सचिव पर बनाया गया।
दबाव और विरोध
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा लगातार दबाव डाला गया, लेकिन ग्राम पंचायत सचिव ने नियमों का हवाला देते हुए कथित भ्रष्टाचार में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि सरपंच, पंच और सचिव—तीनों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था।
शिकायत और निलंबन पर सवाल
आरोप है कि नेताओं द्वारा 4 दिसंबर 2026 को शिकायत प्रभारी मंत्री से की गई।
चौंकाने वाली बात यह है कि
1.शिकायत की कोई लिखित प्रति सार्वजनिक नहीं की गई,
2.कोई प्रारंभिक जांच नहीं कराई गई,
3.सचिव का पक्ष सुने बिना ही उसी दिन निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि प्रभारी मंत्री के निर्देश पर अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की।
स्थानीय नाराजगी और राजनीतिक संकेत
स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर गहरी नाराजगी है। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय विधायक भ्रष्टाचार रोकने के पक्ष में थे और मामले को गंभीरता से लेने का संकेत भी दिया था, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया।
ग्रामीणों के सवाल
ग्रामीणों का सीधा सवाल है—
यदि बाजार मूल्य 13,500 रुपये है, तो 25,500 रुपये का बिल किस आधार पर बनाया गया?
बिना जांच किसी कर्मचारी को निलंबित करना प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं है क्या?
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि भ्रष्टाचार का विरोध करने वालों को ही दंडित किया जाएगा, तो इससे ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और व्यवस्था पर से भरोसा उठेगा।
निष्पक्ष जांच की मांग
अब यह मामला केवल समर्सिबल पंप खरीदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक दबाव का प्रतीक बन गया है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि—
1.पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराई जाए,
2.समर्सिबल पंप खरीदी से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं,
3.यदि सचिव ने नियमों के तहत कार्य किया है तो उन्हें तत्काल बहाल किया जाए, और यदि कहीं भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
यह मामला प्रशासन के लिए एक परीक्षा है—ईमानदारी को सजा मिलेगी या भ्रष्टाचार पर चोट।


Social Plugin