सौंदर्यीकरण के दावों के बीच दम तोड़ता कुआं, मलबे और कचरे में पटा जलस्रोत

 

एक ओर बैकुंठपुर नगर पालिका शहर के विभिन्न स्थानों पर कुओं का सौंदर्यीकरण कर लाखों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर मानस भवन के पास स्थित एक पुराना कुआं बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। कभी इस कुएं से आसपास के लोगों को पानी मिलता था, लेकिन आज यह कुआं मलबे और कचरे से पूरी तरह पाट दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदारों की नजर इस ओर अब तक नहीं पड़ी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार मानस भवन के पास स्थित यह कुआं कभी इलाके का प्रमुख जलस्रोत था। गर्मी के दिनों में भी यहां पानी उपलब्ध रहता था। लेकिन धीरे-धीरे इसकी अनदेखी होती गई और अब हालत यह है कि कुएं में पानी की जगह मलबा, प्लास्टिक और घरेलू कचरा भरा हुआ है।

नगर पालिका द्वारा शहर के अन्य कुओं का सौंदर्यीकरण कर उन्हें आकर्षक रूप दिया जा रहा है, लेकिन इस कुएं की सफाई और संरक्षण को लेकर कोई पहल नजर नहीं आ रही। सवाल उठता है कि क्या सौंदर्यीकरण सिर्फ दिखावे के लिए है?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस कुएं की सफाई कर पुनर्जीवित किया जाए तो यह जल संकट के समय एक उपयोगी स्रोत बन सकता है। साथ ही खुले पड़े मलबे से बदबू भी आती है।

अब देखना होगा कि बैकुंठपुर नगर पालिका इस उपेक्षित कुएं की ओर कब ध्यान देती है। और कब इसके सौंदर्यीकरण का काम शुरू हो पाता है और क्या यह कुआं भी कभी फिर से जलस्रोत के रूप में जीवित हो पाएगा या यूं ही मलबे में दबा रह जाएगा — यह आने वाला समय ही बताएगा