बैकुंठपुर शहर में आवारा मवेशियों की समस्या नई नहीं है, लेकिन प्रशासन की कार्यप्रणाली जरूर सवालों के घेरे में है। 16–17 फरवरी को मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर नगर पालिका और जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आया। मुख्यमंत्री के काफिले के रास्ते में मवेशी न दिखें, इसके लिए छोटे-बड़े सभी कर्मचारियों को सड़क किनारे गायों को हटाने में लगाया गया।लेकिन मुख्यमंत्री के जाते ही शहर की सड़कों पर फिर से गायों का झुंड दिखाई देने लगा।
नगर पालिका के चार कर्मचारियों को मवेशियों को हटाने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उनकी कार्रवाई केवल घड़ी चौक से बस स्टैंड तक ही सीमित नजर आती है। जबकि शहर में सबसे ज्यादा मवेशियों का जमावड़ा एसईसीएल चौक और ओढ़गी नाका रोड पर रहता है, जहां रोजाना वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल वीआईपी दौरे के समय ही सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन आम दिनों में सड़कों पर घूम रहे मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाओं और जाम की समस्या को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
अब सवाल यह है कि क्या नगर पालिका केवल वीआईपी मूवमेंट तक ही अपनी जिम्मेदारी निभाएगी, या फिर शहर को स्थायी रूप से आवारा मवेशियों से राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी


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