देखरेख के अभाव में करोड़ों की मशीनें कबाड़, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल

 

बैकुंठपुर का फिल्टर प्लांट इन दिनों पानी शुद्धिकरण केंद्र कम और नगर पालिका का कबाड़ ग्रह ज्यादा नजर आ रहा है। यहां खड़े छोटे-बड़े नगर पालिका के वाहन देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति उस लिफ्टर मशीन की है जो मूलतः स्ट्रीट लाइट सुधारने के लिए खरीदी गई थी। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इस मशीन का उपयोग लाइट सुधारने से ज्यादा पेड़ कटाई में किया जा रहा है। नतीजा यह है कि मशीन समय से पहले ही खराब रहने लगी है और अधिकांश समय बंद पड़ी रहती है।

वहीं कुछ वर्ष पूर्व खरीदी गई नई जेसीबी का हाल भी बेहाल है। पुरानी जेसीबी पहले ही कबाड़ में बदल चुकी है और फिल्टर प्लांट की शोभा बढ़ा रही है, जबकि नई जेसीबी भी खराब होकर वहीं खड़ी है।

सिर्फ जेसीबी ही नहीं, कचरा ढोने वाले वाहन और बिजली लाइनमैन के वाहन भी जर्जर हालत में पड़े हैं। मरम्मत के अभाव में ये वाहन उपयोग से बाहर हो चुके हैं, जिससे नगर की सफाई और विद्युत व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।



सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फिल्टर प्लांट में इन कार्यों के लिए तीन-तीन कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, तो फिर वाहनों की नियमित देखरेख क्यों नहीं हो पा रही? स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका मरम्मत पर ध्यान देने के बजाय नए वाहन खरीदने में ज्यादा विश्वास रखती है, जिससे शासकीय राशि का दुरुपयोग हो रहा है।

नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इन वाहनों की देखभाल और मरम्मत की जाती, तो लाखों रुपये के संसाधन कबाड़ में तब्दील नहीं होते। अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करता है या फिर फिल्टर प्लांट यूं ही कबाड़ का अड्डा बना रहेगा।