बैकुंठपुर में नगरपालिका के लगाए डस्टबिन अब खुद बने कचरा... स्वच्छ भारत अभियान पर संकट

केंद्र सरकार का स्वच्छ भारत मिशन देश को साफ और स्वच्छ बनाने का सपना दिखाता है, लेकिन बैकुंठपुर में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। नगरपालिका द्वारा लगाए गए महंगे डस्टबिन अब खुद कचरे में तब्दील हो चुके हैं। कई डस्टबिन टूटे पड़े हैं, तो कई गायब हो चुके हैं, जिससे शहर में जगह-जगह गंदगी का अंबार लग गया है।

जहां कभी साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगरपालिका ने डस्टबिन लगाए थे। लेकिन अब हालत ये है कि वही डस्टबिन कचरे के ढेर में दबे दिखाई दे रहे हैं। कुछ डस्टबिन टूटकर बेकार हो गए हैं, तो कई अपनी जगह से गायब हैं नतीजा ये कि लोग मजबूरी में सड़क किनारे और खाली प्लॉट में कचरा फेंक रहे हैं, जिससे गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डस्टबिन की खरीदी में पहले भी सवाल उठे थे। कीमत ज्यादा और गुणवत्ता कमजोर होने के आरोप लगे थे। अब डस्टबिन के टूटने और गायब होने के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर इस पूरे मामले की जिम्मेदारी किसकी है? नगरपालिका की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर समय-समय पर देखरेख होती, तो शायद ये डस्टबिन आज कबाड़ नहीं बने होते।

खुले में पड़े कचरे से बदबू फैल रही है और मच्छरों व बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। आसपास रहने वाले लोग परेशान हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों पर भी है। लेकिन बैकुंठपुर में जमीनी सच्चाई इस मिशन की पोल खोलती नजर आ रही है।

अब देखना ये होगा कि नगरपालिका इस बदहाल व्यवस्था को कब तक नजरअंदाज करती है, या फिर जल्द कोई ठोस कदम उठाकर शहर को गंदगी से राहत दिलाती है।