कोरिया जिले में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर को “चमकाने” के नाम पर नगर पालिका ने अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया है। लोगों का कहना है आज नगरपालिका की नींद टूट ही गई लगता है आज ही अतिक्रमण हुआ है ,,लेकिन इस कार्रवाई पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि छोटे ठेला और फुटपाथ दुकानदारों पर सख्ती दिखाई जा रही है, जबकि कुछ पक्के और रसूखदार अतिक्रमणों को अनदेखा किया जा रहा है।
नगर पालिका की टीम ने आज शहर के कई हिस्सों में ठेले, गुमटियां और फुटपाथ पर लगी छोटी दुकानों को हटाया। ठेला चलाकर रोज़ी कमाने वाले लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना पर्याप्त समय दिए दुकानें हटाने को मजबूर किया गया। कई लोगों ने कहा कि उनका सामान जब्त करने की चेतावनी भी दी गई।
पक्षपात के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई सब पर समान रूप से नहीं हो रही। अटल परिसर के बगल में कुछ दुकानों को हटाया गया हैं जबकि कुछ दुकानों को नहीं हटाया जा रहा है ..फव्वारा चौक और बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाकों में बड़े और स्थायी अतिक्रमण अब भी जस के तस बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि वहां कार्रवाई न होना साफ तौर पर पक्षपात को दिखाता है।
राजनीतिक एंगल
शहर में चर्चा है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सिर्फ मुख्य सड़कों और दिखने वाले इलाकों में कार्रवाई कर शहर को ‘साफ-सुथरा’ दिखाने की कोशिश हो रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या वीआईपी विजिट के नाम पर गरीबों की रोज़ी-रोटी पर असर डाला जा रहा है?
बड़ा सवाल
जब नियम सबके लिए बराबर हैं,
तो कार्रवाई भी बराबर क्यों नहीं?
क्या नगर पालिका का अभियान व्यवस्था सुधार के लिए है या सिर्फ दिखावे के लिए? और इतनी बड़ी कार्रवाई में नगर पालिका अधिकारी नदारद क्यों है



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