जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर पर पक्षपात के आरोप: कुछ सचिवों पर सख्ती, कुछ पर नरमी? मलाई-मिठाई के आरोपों से गरमाया माहौल

 

Hrithik shivhare जनवरी 27, 2026

 बैकुण्ठपुर। जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। ग्राम पंचायत सचिवों के साथ किए जा रहे कथित दोहरे व्यवहार को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जनपद पंचायत अधिकारी बैकुण्ठपुर द्वारा कुछ सचिवों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाती है, जबकि अन्य मामलों में स्पष्ट नियम उल्लंघन के बावजूद केवल नोटिस जारी कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इस दोहरे रवैये का उदाहरण पूर्व में सामने आ चुका है। ग्राम पंचायत केनापारा के तत्कालीन सचिव श्रीपाल भगत द्वारा स्थानांतरण के बाद प्रभार नहीं देने के मामले में तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ सिद्धार्थ खैरवार ने बिना देरी किए उन्हें निलंबित कर दिया था। उस समय प्रशासन की सख्ती की सराहना भी हुई थी। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कटकोना के सचिव गणेश राजवाड़े का स्थानांतरण 03 नवंबर 2025 को हुआ था। लगभग 85 दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने प्रभार नहीं सौंपा है। गंभीर बात यह है कि उन पर शासकीय दस्तावेजों में छेड़छाड़ का आरोप है और वे दोषी भी पाए गए हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ अब तक निलंबन जैसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाई जा रही है। इसी तरह ग्राम पंचायत भण्डारपारा में भी सचिव का स्थानांतरण हुए 85 दिनों से अधिक समय हो चुका है, लेकिन वहां भी प्रभार नहीं दिया गया है। ग्राम पंचायत तलवापारा में हालात और भी गंभीर हैं, जहां सचिवीय अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक उदासीनता के चलते ग्राम सभा का बहिष्कार तक करना पड़ा।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि जिला अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनपद पंचायत अधिकारी बैकुण्ठपुर उन्हें दरकिनार कर रहे हैं। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि आखिर कुछ सचिवों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है और दूसरों के साथ सख्ती क्यों बरती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर में शासकीय कार्यों के लिए अधिकारी और लिपिक स्तर पर कथित रूप से “2 प्रतिशत कमीशन” की व्यवस्था बनी हुई है। आरोप है कि बिना इस कथित कमीशन के कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। यही कारण बताया जा रहा है कि जिन सचिवों द्वारा “भरपूर मलाई-मिठाई” दी जा रही है, उनके मामलों में नरमी बरती जा रही है। इन आरोपों ने जनपद पंचायत की छवि को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर मामला भी अन्य विवादों की तरह दबा दिया जाएगा। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर जनपद पंचायत अधिकारी को और कितनी “मलाई-मिठाई” चाहिए कि नियम सबके लिए एक समान लागू हों।

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