स्थानांतरण नियमों की खुलेआम अनदेखी, जनपद पंचायत अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल

 


 कोरिया। जिले के अंतर्गत जनपद पंचायत क्षेत्र में स्थानांतरण आदेशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भण्डारपारा एवं तलवापारा ग्राम पंचायत के ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण आदेश जारी हुए लगभग तीन माह बीतने को हैं, लेकिन अब तक उन्होंने अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर पदभार ग्रहण नहीं किया है। शासकीय नियमों के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी होने के पश्चात अधिकतम सात दिवस के भीतर संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी को नवीन स्थान पर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य होता है, किंतु यहां नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।

छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 एवं सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार स्थानांतरण आदेश के बाद पुराने पद पर किसी भी प्रकार का शासकीय कार्य, वित्तीय लेनदेन अथवा प्रशासनिक निर्णय लेना पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत तलवापारा और ग्राम पंचायत भण्डारपारा में स्थानांतरण के बाद भी संबंधित सचिवों द्वारा लगातार वित्तीय एवं प्रशासनिक लेनदेन किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद पंचायत अधिकारी द्वारा जानबूझकर इस गंभीर मामले पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि कथित रूप से “मलाई-मिठाई” पहुंचने के कारण नियमों को ताक पर रखा गया है। यदि कोई अन्य सामान्य या बिना प्रभाव वाला ग्राम सचिव होता, तो अब तक उसके विरुद्ध निलंबन जैसी कठोर कार्यवाही की जा चुकी होती। पूर्व में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां उच्च स्तर के निर्देश या मंत्री के आदेश पर तत्काल प्रभाव से निलंबन किया गया है।

तलवापारा ग्राम पंचायत में हाल ही में ग्राम सभा का बहिष्कार ग्रामीणों द्वारा किया गया था, जो प्रशासनिक अव्यवस्था और असंतोष को दर्शाता है। वहीं मंगलवार को भण्डारपारा में ग्राम सभा का आयोजन प्रस्तावित है, लेकिन स्थानांतरण विवाद और अवैध लेनदेन के कारण ग्रामवासियों में रोष व्याप्त है।

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्यवाही न होना, जिला प्रशासन की मौन स्वीकृति की ओर इशारा करता है। शासन के स्पष्ट नियमों के बावजूद यदि अधिकारी और कर्मचारी मनमाने ढंग से कार्य करते रहें और उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही न हो, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या स्थानांतरण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा या फिर नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।

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