Hrithik shivhare
जनवरी 27, 2026
बैकुंठपुर जनपद पंचायत में सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल धाराओं की अनदेखी का मामला सामने आया है। आवेदक द्वारा 24 घंटे के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जो कि आरटीआई अधिनियम की धारा 7(1) के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध न कराए जाने के कारण आवेदक ने 48 घंटे पश्चात जिला पंचायत अधिकारी के समक्ष सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर की।
प्रथम अपील दायर होने के बावजूद जनपद पंचायत अधिकारी, बैकुंठपुर द्वारा न तो समय पर सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया गया। जानकारी दिए जाने के बजाय आवेदक को यह कहकर भ्रमित किया गया कि संबंधित सूचना “23 पनने” के बाद ही उपलब्ध होगी तथा जानकारी प्राप्त करने के लिए शुल्क जमा करना होगा। जबकि सूचना के अधिकार अधिनियम स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि यदि निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है और आवेदक प्रथम अपील करता है, तो विलंब की स्थिति में सूचना निःशुल्क प्रदान की जानी चाहिए।
आरटीआई अधिनियम की धारा 7(6) के अनुसार, यदि लोक सूचना अधिकारी समय सीमा का उल्लंघन करता है तो आवेदक से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा सकता। इसके अतिरिक्त, धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर होने के बाद संबंधित अधिकारी का यह दायित्व बनता है कि वह शीघ्र और विधिसम्मत रूप से सूचना उपलब्ध कराए। इसके बावजूद जनपद पंचायत अधिकारी द्वारा शुल्क की मांग करना अधिनियम की भावना और प्रावधानों के प्रतिकूल माना जा रहा है। इस पूरे प्रकरण ने जनपद पंचायत बैकुंठपुर में सूचना अधिकार कानून की समझ और उसके क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी स्वयं आरटीआई की धाराओं से अनभिज्ञ रहेंगे तो पारदर्शिता और जवाबदेही का उद्देश्य कैसे पूरा होगा। अब देखना होगा कि जिला स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है और आवेदक को उसका वैधानिक अधिकार कब तक प्राप्त होता है।
