जिला पंचायत अधिकारी के निर्देशों की अनदेखी, जनपद पंचायत अधिकारी पर नियमों को दरकिनार करने का आरोप




कोरिया। जिले में पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला पंचायत अधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनपद पंचायत अधिकारी द्वारा कार्रवाई न किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार 3 नवंबर 2025 को जिले में ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था। आदेश के बाद कई ग्राम पंचायत सचिवों ने अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर जाकर विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया, लेकिन ग्राम पंचायत तलवापारा, ग्राम पंचायत भंडारपारा एवं ग्राम पंचायत काटकोना के सचिवों ने अब तक पदभार ग्रहण नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, इस गंभीर लापरवाही को लेकर जिला पंचायत अधिकारी द्वारा जनपद पंचायत अधिकारी को पुनः निर्देश जारी किए गए थे कि संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई दर्ज की जाए और नियमों के तहत उन्हें पदमुक्त किया जाए। इसके बावजूद जनपद पंचायत अधिकारी ने अब तक उक्त निर्देशों का पालन नहीं किया है, जिससे प्रशासनिक उदासीनता साफ झलकती है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप है कि स्थानांतरित हो चुके ग्राम पंचायत सचिव अब भी ग्राम पंचायतों के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं और 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। नियमों के अनुसार, स्थानांतरण के पश्चात किसी भी ग्राम पंचायत सचिव को विकास मद की राशि के उपयोग अथवा हेरफेर का कोई अधिकार नहीं होता। ऐसी स्थिति में जनपद पंचायत अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह तत्काल संबंधित ग्राम पंचायत के बैंक खाते पर होल्ड लगाए, ताकि शासकीय धन का दुरुपयोग न हो सके।

लेकिन आरोप है कि जनपद पंचायत अधिकारी ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि नियम-कानून को दरकिनार कर मनमानी की जा रही है और इसमें जनपद पंचायत अधिकारी की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। 15वें वित्त की राशि, जो गांवों के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत होती है, उसके दुरुपयोग से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और शासन की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो पंचायत व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेता है और जनपद पंचायत अधिकारी के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।

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